छोटी- सी अल्लारखी अपनी बड़ी बहनों ईदन और हैदर बांदी के साथ लाहौर के एक सिनेमाघर में फिल्म का शो शुरू होने से पहले नाच-गा रही थी। वह बड़े गुलाम अली खान से संगीत की शिक्षा ले रही थी और उसने मंच पर गाना भी शुरू कर दिया था। फिल्म शुरू होते ही अल्लारखी गाना खत्म कर दर्शकों में बैठ गई। उसकी तमन्ना थी कि एक दिन वह मंच से उतर कर सिनेमा के परदे पर नाचे-गाए और लोग उसकी अदा और गाने सुनकर तालियां बजाएं। समय के साथ अल्लारखी की यह तमन्ना पूरी हुई और दुनिया ने उस नूरजहां को सिर-आंखों पर लिया, जिनकी आज जयंती है।
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