जब तक लोग न्यू थियेटर्स की ‘देवदास’ देखेंगे, तब तक केएल सहगल जिंदा रहेंगे। और जब तक केएल सहगल जिंदा रहेंगे, तब तक प्रमथेशचंद्र बरुआ भी जिंदा रहेंगे। हो सकता है यह पीढ़ी इस महान लेखक, अभिनेता, निर्देशक, संपादक को न जानती हो, मगर इससे बरुआ का सिनेमा की दुनिया को दिया गया योगदान कम नहीं होता है। वह कई नजर नहीं आने वाले नींव के पत्थरों की मानिंद हैं, जिन पर भारतीय सिनेमा का भव्य और आलीशान भवन आज भी टिका हुआ है। गुरुवार को उनकी 67वीं पुण्यतिथि थी।
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