हिंदी फिल्मों के शुरुआती दौर की खलनायिकाओं में कुलदीप कौर की अपनी शान थी। शादीशुदा कुलदीप और शादीशुदा प्राण लंबे समय तक अच्छे मित्र रहे। विभाजन के दौरान दोनों लाहौर छोड़ मुंबई आए, जहां कुलदीप ने 1948 से लेकर 1960 तक फिल्मों में काम कर अपनी एक अलग जगह बनाई। 1947 के दंगों में प्राण की छूट गई कार को लाहौर से चला कर मुंबई तक पहुंचाया था कुलदीप कौर ने, जिनकी मौत मात्र एक कांटा गड़ने से हुई थी।
from Jansattaमनोरंजन – Jansatta http://bit.ly/2sXQphY
Az
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मुझे मोदी से नफरत नहीं लेकिन चेहरा देखते ही गुस्सा आ जाता है- कॉमेडियन ने शेयर किया वीडियो, मिले ऐसे जवाब
कॉमेडियन कुणाल कामरा अक्सर मोदी सरकार पर मजाकिया टिप्पणी करते रहते हैं। इसी बहाने वह सरकार पर तीखा तंज भी कसते हैं। अब कामरा ने एक वीडियो शे...
-
Samsung Galaxy F62 vs Xiaomi Mi10i vs OnePlus Nord 5G Price in India, Specifications: सैमसंग गैलेक्सी एफ62 भारत में लॉन्च और इसका सीधा मुकाब...
-
पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिले के रामपुरहाट में सोमवार को आग से जलकर 8 लोगों की हुई मौत में गृहमंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है। वहीं इस घटना के ब...
-
डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने मनोज बाजपेयी से जुड़ा एक किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया था, 'मेरी शादी वाले दिन मनोज और तिग्मांशु का किसी...
No comments:
Post a Comment