मोहम्मद रफी और आशा भोसले को संगीतकारों ने ऊपर की पट्टी से गवा गवा कर लाउड स्पीकर बना रखा था। जब रफी को ‘शोला और शबनम’ (1961) में ‘जाने क्या ढूंढ़ती रहती है ये आंखें मुझमें...’ गाना पड़ा तो 21 रीटेक हुए। ‘उमराव जान’ में इसी परेशानी का सामना किया आशा भोसले ने। ‘दिल चीज क्या है...’ की रेकॉर्डिंग पर नीचे की पट्टी में गाने में उन्हें परेशानी हुई।
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