राजीव नगर में एक पड़ोसी का कहना है, ‘मुझे यकीन नहीं होता कि सुशांत ने ऐसा कदम उठाया है। वह कितना जिंदादिल था, उसने अपनी जिंदादिली से दूसरों को जीना सिखाया है। तबीयत सही नहीं होने के बावजूद उसके पिता रोज सुबह सैर पर निकलते थे और हम लोग उनके बेटे के बारे में कितनी बातें किया करते थे।’
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