अभिषेक पॉल की परवरिश नागपुर की एक बस्ती में हुई थी। गुंडागर्दी, शराब, ड्रग्स के साथ उनका पाला बहुत जल्दी पड़ गया था। जुर्म की दुनिया ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। अचानक हालात ऐसे हो गए कि उनकी जिंदगी पर खतरना मंडराने लगे। उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था, तभी फुटबॉल ने उनकी जिंदगी बदल दी।
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