वाणी प्रकाशन के समूह निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि जहां भी अराजकता होती है वहां न्याय की शरण में जाना ही होता है। इस किताब के लिए हमने नख-शिख तक परिश्रम किया था। हमारा सपना था कि भारतीय सिनेमा को लेकर एक बड़ी किताब निकालें।
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