Az

Thursday, November 29, 2018

आग में जलकर भी जी उठा पहला ‘देवदास’

जब तक लोग न्यू थियेटर्स की ‘देवदास’ देखेंगे, तब तक केएल सहगल जिंदा रहेंगे। और जब तक केएल सहगल जिंदा रहेंगे, तब तक प्रमथेशचंद्र बरुआ भी जिंदा रहेंगे। हो सकता है यह पीढ़ी इस महान लेखक, अभिनेता, निर्देशक, संपादक को न जानती हो, मगर इससे बरुआ का सिनेमा की दुनिया को दिया गया योगदान कम नहीं होता है। वह कई नजर नहीं आने वाले नींव के पत्थरों की मानिंद हैं, जिन पर भारतीय सिनेमा का भव्य और आलीशान भवन आज भी टिका हुआ है। गुरुवार को उनकी 67वीं पुण्यतिथि थी।

from Jansattaमनोरंजन – Jansatta https://ift.tt/2PaICGv

No comments:

Post a Comment

मुझे मोदी से नफरत नहीं लेकिन चेहरा देखते ही गुस्सा आ जाता है- कॉमेडियन ने शेयर किया वीडियो, मिले ऐसे जवाब

कॉमेडियन कुणाल कामरा अक्सर मोदी सरकार पर मजाकिया टिप्पणी करते रहते हैं। इसी बहाने वह सरकार पर तीखा तंज भी कसते हैं। अब कामरा ने एक वीडियो शे...