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Thursday, January 17, 2019

हमारी याद आएगी: एमजी रामचंद्रन, जिंदगी इम्तहान लेती है…

1944 में पेरियार (जस्टिस ईवी रामास्वामी) ने गैरराजनैतिक जस्टिस पार्टी (1916 में बनी) को नया नाम दिया द्रविड़ कझगम और स्वतंत्र राज्य द्रविड़नाडु की मांग की। मगर पेरियार और अन्नदुराई के मतभेदों से पार्टी टूटी। अन्नादुराई ने नई पार्टी द्रविण मुनेत्र कझगम (डीएमके) बनाई और हिंदी विरोध का झंडा उठा कर 1956 में राजनीति में प्रवेश किया। यही डीएमके बाद में एमजीआर की बगावत के बाद टूटी और आज की एआइएडीएमके बनी, जिसने एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता जैसे दो कलाकारों को सिनेमा की दुनिया से उठाकर सूबे की सियासत की सबसे ऊंची कुर्सी पर बिठाया।

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