1944 में पेरियार (जस्टिस ईवी रामास्वामी) ने गैरराजनैतिक जस्टिस पार्टी (1916 में बनी) को नया नाम दिया द्रविड़ कझगम और स्वतंत्र राज्य द्रविड़नाडु की मांग की। मगर पेरियार और अन्नदुराई के मतभेदों से पार्टी टूटी। अन्नादुराई ने नई पार्टी द्रविण मुनेत्र कझगम (डीएमके) बनाई और हिंदी विरोध का झंडा उठा कर 1956 में राजनीति में प्रवेश किया। यही डीएमके बाद में एमजीआर की बगावत के बाद टूटी और आज की एआइएडीएमके बनी, जिसने एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता जैसे दो कलाकारों को सिनेमा की दुनिया से उठाकर सूबे की सियासत की सबसे ऊंची कुर्सी पर बिठाया।
from Jansattaमनोरंजन – Jansatta http://bit.ly/2MfRhYk
Az
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मुझे मोदी से नफरत नहीं लेकिन चेहरा देखते ही गुस्सा आ जाता है- कॉमेडियन ने शेयर किया वीडियो, मिले ऐसे जवाब
कॉमेडियन कुणाल कामरा अक्सर मोदी सरकार पर मजाकिया टिप्पणी करते रहते हैं। इसी बहाने वह सरकार पर तीखा तंज भी कसते हैं। अब कामरा ने एक वीडियो शे...
-
55 वर्षीय अमित शाह रविवार को कोरोना पॉजिटिव पाए गए। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। f...
-
माधुरी दीक्षित छोटे परदे पर हों या बड़े परदे पर, हमेशा लाजवाब अभिनय करती हैं। जल्द ही उनकी फिल्म ‘टोटल धमाल’ आने वाली है। हाल में इस फिल्म का...
-
अभिषेक बच्चन ने कोरोना वायरस से जंग जीत ली है। 28 दिन बाद अभिषेक बच्चन की कोविड-19 टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। from Jansattaमनोरंजन – Jan...
No comments:
Post a Comment