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Thursday, June 27, 2019

आरडी बर्मन (27 जून, 1939- 4 जनवरी, 1994): एक सवाल के पच्चीस साल

आरडी बर्मन कर्णप्रिय ध्वनियां पैदा करने के लिए सिर्फ ताल या स्वर वाद्यों पर ही निर्भर नहीं रहे। बोतल, कप से लेकर बाल संवारने वाले कंघे तक का इस्तेमाल उन्होंने गाने बनाने के लिए किया। बंगाली लोकगीत में जैज या डिस्को मिला कर संगीत की सीमाओं का विस्तार करना उन्हें खूब आता था। ‘घर आजा घिर आए बदरा...’ (पहली फिल्म ‘छोटे नवाब’) जैसी बंदिश हो, ‘शोले’ जैसी ऐतिहासिक सफलता रचने वाली फिल्म हो या ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा...’ (‘1942- ए लव स्टोरी’) जैसा देश भर की जुबान पर चढ़ने वाला गाना, आरडी एक हरफनमौला संगीतकार के रूप में सामने आते हैं। अपने समय से 20 साल आगे चलने वाले इस संगीतकार के बारे में कहा जाता था कि आरडी का कोई भरोसा नहीं, वह कभी भी कमाल कर सकते हैं। आरडी के निधन के बाद उनकाबैंक लॉकर विवाद का कारण बना था। अदालत के निर्देश पर जब यह खोला गया, तो एक सवाल हवा में तैर गया। वह सवाल आज भी ज्यों-का-त्यों है।

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