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Thursday, August 22, 2019

हमारी याद आएगीः संगीत के कदरदान मिले और वे चमकते गए

मोहम्मद रफी और आशा भोसले को संगीतकारों ने ऊपर की पट्टी से गवा गवा कर लाउड स्पीकर बना रखा था। जब रफी को ‘शोला और शबनम’ (1961) में ‘जाने क्या ढूंढ़ती रहती है ये आंखें मुझमें...’ गाना पड़ा तो 21 रीटेक हुए। ‘उमराव जान’ में इसी परेशानी का सामना किया आशा भोसले ने। ‘दिल चीज क्या है...’ की रेकॉर्डिंग पर नीचे की पट्टी में गाने में उन्हें परेशानी हुई।

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