जब भी सामाजिक फिल्मों में झगड़ालू सास की भूमिकाओं की बात आती है, ललिता पवार का नाम दिमाग में सबसे पहले आता है, जिनकी कल, शनिवार को, 104वीं जयंती है। मगर हिंदी सिनेमा में अच्छाई की बुराई पर जीत की कहानियां खूब चलती हैं और पसंद भी की जाती हैं। तो जब भी ललिता पवार ने उदार दिल महिला की भूमिका निभाई, उन्हें खूब पसंद किया गया। इसकी मिसाल ‘अनाड़ी’ (1959) और ‘आनंद’ (1970) जैसी फिल्मों में मिलती है। दोनों फिल्मों में उनका नाम मिसेज डीसा नामक सहृदय महिला का था और उन्हेें दर्शकों ने खूब सराहा था। बेजोड़ अभिनय के दम पर ललिता पवार ने इतने पुरस्कार जीते कि उन्हें सजाने के लिए ड्राइंग रूम में जगह कम पड़ गई। मगर इन पुरस्कारों में एक पुरस्कार खास था जो उन्हें तब मिला था, जब फिल्मी दुनिया में पुरस्कारों का चलन नहीं था। फिल्म की सफलता के बाद निर्माता ने इसका आयोजन किया था।
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