‘रेडियो की दुनिया से दो कलाकार-उद्घोषक और गायक कब्बन मिर्जा तथा संगीतकार दान सिंह-फिल्मों में आए। ‘रजिया सुल्तान’ (1983) के दो गानों- ‘आइ जंजीर की झनकार...’, ‘तेरा हिज्र मेरा नसीब है...’ ने कब्बन मिर्जा को, तो ‘माय लव’ के दो गानों- ‘जिक्र होता है जब कयामत का...’, ‘वो तेरे प्यार का गम...’ ने दान सिंह को मशहूर कर दिया। दोनों गुणी कलाकारों की फिल्मजगत में उपेक्षा हुई, तो वे वापस रेडियो की दुनिया में लौट गए। दान सिंह संगीतकार खेमचंद प्रकाश के चेले थे, जिन्होंने ‘महल’ (1949) में ‘आएगा आने वाला...’ गाना बनाया, जिससे लता मंगेशकर ने सफलता की पहली सीढ़ी पर कदम रखा था। खेमचंद प्रकाश से डेढ़ साल तक दान सिंह ने भैरवी सीखी। एक दिन ऊबकर दूसरा राग सिखाने को कहा, तो खेमचंद प्रकाश ने एक चेले की तरफ इशारा करके कहा कि इसे भैरवी सीखते आठ साल हो गए हैं। आज दान सिंह की नौवीं पुण्यतिथि है।
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