जैसे राज कपूर की फिल्मों में संगीतकार शंकर-जयकिशन, बीआर चोपड़ा की फिल्मों में संगीतकार रवि का अहम योगदान है, वैसे ही एआर कारदार की फिल्मों में नौशाद का अहम योगदान रहा है। कारदार-नौशाद ने मिलकर हिंदी सिनेमा को दर्जन भर से ज्यादा बेहतरीन फिल्में दीं। नौशाद ने सात सालों तक कारदार की शर्तों पर काम किया। फिर एक वक्त ऐसा भी आया, जब कारदार को नौशाद की शर्तों पर ‘दिल दिया दर्द लिया’ जैसी फिल्म करनी पड़ी। 1940 और 1950 के दशक में मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में कारदार की तूती बोलती थी। आज कारदार की 116वीं जयंती है।
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