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Tuesday, March 23, 2021

B-Day Special: हाजिरजवाबी में माहिर स्मृति ईरानी तब गली में ‘छेड़ने’ वालों की कर देती थीं धुनाई, किस्सा सुना बोलीं- इतनी शांत न थी

उनके नानाजी का विश्वास था कि वह एक दिन जरूर कुछ बनेंगी। नानाजी के देहांत के बाद उन्हें लगा कि कुछ बनना चाहिए। जिससे वह उनके विश्वास पर खरा उतरकर दूसरे लोगों को गलत साबित कर सकें। यही से उनका जीवन बदल गया।

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