बीस से ज्यादा भाषाओं-बोलियों में फिल्में बनाने वाले भारत में बॉलीवुड का खास स्थान है। प्रादेशिक भाषाओं के बीच भारी भरकम बजट की भव्य फिल्में, अखिल भारतीय स्तर पर लोकप्रिय सितारे, ज्यादा से ज्यादा सिनेमाघरों में फिल्म की रिलीज और बॉक्स पर आॅफिस पर मोटा एकत्रण। इन खूबियों के चलते प्रादेशिक भाषाओं की फिल्मों को बॉलीवुड बहुत पीछे छोड़ता रहा है। मगर अब बजट से लेकर बॉक्स आॅफिस कलेक्शंस तक हर मामले में दक्षिण की प्रादेशिक फिल्में बॉलीवुड की प्रतिष्ठा को चुनौती दे रही हैं।
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