जिसे चाहा... उसका साथ नहीं मिला... तो क्या उसे भुलाने के लिए शराब को साथी बना लिया... वो साथी जो मरते दम तक उनके साथ रहा... संजीव कुमार की उम्र क्या थी तब... महज़ 47 साल... वो जानते थे कि उनके परिवार में ज़्यादा उम्र कोई लिखवा कर नहीं आया... लेकिन किस ग़म ने संजीव कुमार को इतना लाचार बना दिया था... क्या नाकाम मोहबब्त का ग़म उनके ऊपर हावी होने लगा था... संजीव कुमार का फ़साना भी देवदास जैसा ही है...पढ़िए...
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