उनके नानाजी का विश्वास था कि वह एक दिन जरूर कुछ बनेंगी। नानाजी के देहांत के बाद उन्हें लगा कि कुछ बनना चाहिए। जिससे वह उनके विश्वास पर खरा उतरकर दूसरे लोगों को गलत साबित कर सकें। यही से उनका जीवन बदल गया।
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